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Gold Savings Scheme To Purchase Gold Jewellery

कब खरीदें

सिर्फ आपके लिये बनाई गई गोल्ड ज्वेलरी स्कीम्स

आप गोल्ड ज्वेलरी में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, लेकिन छोटी इन्स्टॉलमेन्ट्स में, जो आपकी पर्चेस के प्लान के समय सही रकम जमा कर सके। अनेक ज्वेलर्स अपनी ओर से कुछ गोल्ड सेविंग स्कीम्स आपके लिए तैयार करते हैं।

इन स्कीम्स में ये सुविधाएं दी जाती है।

सरल तरीके से देखा जाए, तो यह वैसी ही स्कीम है जैसी आप बैंक में रेकरिंग डिपॉजिट के नाम से खोलते हैं। फर्क सिर्फ इतना ही है कि इस गोल्ड सेविंग स्कीम के मैच्योर होने पर आपको अपना पैसा उस ज्वेलर से ज्वेलरी के रुप में लेना होता है जहां पर आप पैसा जमा करते हैं।

इस स्कीम का समसे सामान्य प्रकार वह होता है जिसमें आपको हर महीने कुछ विशेष अवधि तक कोई रकम जमा करने के लिये कहा जाता है। अधिकांश ज्वेलर अपनी ओर से एक महीने की इन्स्टॉलमेन्ट आपकी बचत में डालते हैं।

इस तरीके से जमा किया गया पैसा उस ज्वेलर से गोल्ड खरीदने में उपयोग में लाया जाता है और जब आप ज्वेलरी खरीदने का विचार करते हैं, तब के गोल्ड रेट इसपर लागू होते हैं।

कई ज्वेलर्स आपको इन्वेस्टेट अमाउन्ट में से गोल्ड कॉईन खरीदने की अनुमति भी देते हैं। लेकिन आपने जमा की हुई रकम को आप नकद में नही ले सकते – यह नियम लगभग सभी इस प्रकार की स्कीम्स में होता ही है।

अधिकांश ज्वेलर्स मेकिंग चार्जेस और वेस्टेज पर छूट देते हैं – कई तो वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लगाते ही नही।

इसी प्रकार की स्कीम के दूसरे प्रकार में ज्वेलर्स आपको हर महीने के पेमेन्ट पर गोल्ड जमा करने की सुविधा देते हैं।

इस प्रकार से, मान लीजिये आपने 1000 रुपये की इन्स्टॉलमेन्ट शुरु की है और इन्स्टॉलमेन्ट भरने के दिन गोल्ड का प्राईज 2500 प्रति ग्राम है तब आपके पास रु 1000/2500 – 0.4 ग्राम गोल्ड उस महीने में होगा। इसी प्रकार से यह स्कीम हर महीने चलती है। यह एक प्रकार से गोल्ड की एस आई पी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान) के रुप में होती है।

कुछ ज्वेलर्स फिक्स्ड वेट स्कीम्स भी चलाते हैं। यहां पर आपको स्कीम शुरु करने से पहले ही यह तय करना होता है कि हर महीने आप अपने अकाउन्ट में कितना गोल्ड एड करेंगे।

आपको जिस दिन पेमेन्ट करना होता है, उसके हिसाब से गोल्ड की जो भी कीमत हो, उसके अनुसार वजन के लिये भुगतान करना होता है।

स्कीम के पूरे होने पर, आप इस तरीके से जमा किया हुआ गोल्ड ले सकते हैं – सामान्य रुप से यह ज्वेलरी के रुप में ही लिया जाता है।

इस स्कीम में भी मेकिंग चार्जेस, वेस्टेज और वैट पर सामान्य रुप से डिस्काउन्ट होता है।

आपको क्या इन्श्योर करने की जरुरत होती है

यह ध्यान रखें कि आप अच्छे व जान पहचान के ज्वेलर के साथ यह इन्वेस्टमेन्ट शुरु करें। कंपनीज एक्ट में बदलाव के बाद भी इनमें से ज्यादातर स्कीम्स जिनमें पब्लिक लिमिटेड कंपनियां भी शामिल है, वे वर्तमान रेग्युलेशन्स के अनुसार डिपॉजिट्स करने की पात्रता नही रखती ऐं। इसलिये ज्वेलर का काम और नाम कैसा है, यह देखना जरुरी है।

यह तब भी ज्यादा सही होता है जब आपको स्कीम के बाद कोई वस्तु खरीदनी होती है क्योंकि बडे और नामचीन ज्वेलर के पास ज्यादा कलेक्शन होता है।

आपको यह भी देखना चाहिये कि आपने स्कीम अच्छे से समझ ली है क्योंकि कुछ ऑफर्स में छोटे बडे बदलाव या फायदे होते हैं। स्कीम से बाहर निकलने के नियमों के बारे में भी पूरी जानकारी रखें जिससे मैच्योरिटी से पहले बाहर निकलने संबंधी पूरी जानकारी आपको मिल सके। प्योरिटी के प्रॉमिस के लिये हमेशा हॉलमार्क की ज्वेलरी ही खरीदें।

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