हॉलमार्किंग नियमों में हाल के बदलाव

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स्वर्ण हालमार्किंग के फायदे सर्वमान्य हैं. नीति निर्धारक, विनियामक और वैश्विक बाज़ार के भागीदार स्वीकार करते हैं कि हॉलमार्क युक्त स्वर्ण घरेलू उपभोक्ताओं के मन में भरोसा पैदा करता है और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों का आत्मविश्वास बढाता है.

भारत में इसके कई अर्थों में व्यापक प्रभाव होंगे जिससे राष्ट्रीय स्वर्ण उद्योग को औपचारिक रूप देने, बाज़ार में उपभाक्ताओं का भरोसा मजबूत करने और विश्व स्तर पर भारतीय आभूषणों की अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. ज्यादा परिपक्वता और अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति मिलने से उद्योग का काफी विस्तार होगा. नतीजतन, देशी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और अच्छी संख्या में रोजगार का सृजन होगा.

उस पृष्ठभूमि में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) ने अप्रैल 2000 में स्वर्ण आभूषण की स्वैच्छिक हॉल मार्किंग व्यवस्था लागू की. मनमोहन सिंह के शासन के दौरान भारत मानक ब्यूरो (बीआइएस) अधिनियम, 1986 में संशोधन का एक प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था, जिसका उद्देश्य स्वर्ण जैसे उत्पादों सहित अनिवार्य हॉलमार्किंग की व्यापकता का विस्तार करना भर था.

काफी लम्बे समय तक स्वर्ण की हालमार्किंग स्वैच्छिक थी. इसके तहत खुदरा स्वर्ण आभूषण विक्रेताओं और निर्माताओं के लिए स्वर्ण पर एक निश्चित मूल्य तय करना जरूरी नहीं था. लेकिन संशोधन से सरकार को अनैतिक जौहरियों से उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए अनिवार्य प्रमाणन लागू करने की शक्ति मिल जाती. बीआइएस हॉलमार्किंग, उपभोक्ताओं द्वारा व्यापक रूप मानी अनुरूपता का चिन्ह, से स्वर्ण आभूषण जैसे उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उपभोत्काओं के मन में अतिरिक्त विश्वास पैदा होता है.

जनवरी 2017 में बीआइएस ने हॉलमार्किंग से सम्बंधित मानदंडों को संशोधित किया. इसमें यह व्यवस्था की गयी कि हॉलमार्क युक्त आभूषण बेचने के लिए अधिकृत जौहरियों द्वारा केवल 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट दर्जे में ही इन्हें बेचा जा सकता है.

बीआइएस के दिशानिर्देश में कहा गया कि, “स्वर्ण और स्वर्ण मिश्रितधातु को उनकी उत्कृष्टता के अनुसार 22, 18,और 14 कैरट के दर्जे में वर्गीकृत किया जाएगा. ये वर्गीकरण स्वर्ण आभूषण/शिल्पकृतियों पर भी लागू हैं.” किन्तु, इस नियमन से जौहरियों पर भी दबाव बढ़ गया क्योंकि उपभोक्ता अलग-अलग कैरटों में आभूषण की मांग करते हैं. इससे जौहरियों और ग्राहकों के बीच और अविश्वास ही बढ़ता. फिर भी, केंद्र सरकार और संशोधन के पक्ष में है जिसके अंतर्गत 2018 में और अधिक कैरट शामिल करके स्वर्ण आभूषण का हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का विचार है.

शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आभूषण उद्योग में ये विनियम बेशक आवश्यक हैं, किन्तु उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के लिए व्यापारियों को विनियमों में बेहतर स्पष्टता की उम्मीद है.

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