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दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड म्यूजियम – म्यूजियो डेल ओरो

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World's largest gold museum in Columbia

आप बोगोटा, कोलंबिया में हों और वहां के मशहूर गोल्ड म्यूजियम, ‘म्यूजियो डेल ओरो’ के दर्शन न करें, यह नामुमकिन है। इस अनूठे संग्रहालय में तीस हजार से भी ज्यादा शुद्ध सोने कलाकृतियाँ हैं, जिनसे दक्षिण अमेरिका की स्थानीय संस्कृति के आरम्भिक कालों की झलक मिलती है। चलिए, इतिहास के इस विश्व प्रसिद्ध संग्रहालय की सुनहरी कथाओं के बारे में कुछ जानते हैं।

बहुत खूबसूरत ढंग से नियोजित इस म्यूजियम में अलग-अलग थीमों पर आधारित बहुत-से कक्ष हैं, जहाँ आप गुजरे जमाने की सैर करते हुए पशुओं की मूर्तियों से लेकर धार्मिक प्रतीक-चिन्हों तक एक से एक अनूठी कलाकृतियों के दर्शन कर सकते हैं। पहला कक्ष ‘पीपल एंड गोल्ड इन प्री-हिस्पेनिक कोलंबिया’ के नाम से जाना जाता है। इस कक्ष में कैलिमा, म्यूसका, सैन अगस्टिन, टैरोना, तेरादेंत्रो, तोलिमा, क्विम्बया, उर्बा और जेनू नामक आदिवासी कबीलों के सुनारों की प्रामाणिक कृतियाँ मौजूद हैं। इस कक्ष का एक विशेष विभाग “कोलंबस के बाद’ के युग को समर्पित है।

म्यूजियम की अन्य मंजिलें हमें जादू-टोने की संस्कृति के रहस्य-लोक में ले जाती हैं, और “ऑफरिंग रूम’, ‘ऑफरिंग बोट’ और ‘लेक’ नामक कक्षों में बंटी हुई हैं। ये तीनों तंत्र-मंत्र के तीन चरणों की झलक देते हैं। अंतिम कक्ष ‘प्रो-फंडेशन’ के नाम से जाना जाता है, जहाँ आप बहुत दिलचस्प विडियों के माध्यम से कुछ अनूठी कलाकृतियों के इतिहास के बारे में जान सकते हैं।

‘म्यूसका रैफ्ट’ म्यूजियम की सबसे मूल्यवान धरोहरों में शामिल है, जिसे सोने की नगरी ‘एल-डोरेडो के मशहूर मिथक से जोड़ा जाता है। प्री-कोलंबियन युग के इस सोने के बेड़े को आदिवासी कबीले राज्याभिषेक की रस्म में इस्तेमाल करते थे। इसके पीछे कहानी यह है कि लेक गोटावीटा में कबीले के नए सरदार के राजतिलक का समारोह मनाया जाता था।, इस अवसर पर नया सरदार अपने शरीर पर सोने की भस्म मलकर और देवताओं के लिए सोने और पन्ने का चढावा लेकर झील में कूद जाता था। म्यूजियम की एक कलाकृति में ऐसे ही एक सरदार को सोने के पंखों से सुसजित दिखाया गया है।

म्यूजियम को कोलंबिया-पूर्व युग के अपने संग्रह पर गर्व है, जिसमे उस युग के कारीगरों की असाधारण प्रतिभा को दर्शाने वाली 1586 स्वर्ण कलाकृतियाँ शामिल हैं। प्रदर्शिनी में इन वस्तुओं के प्रयोग और उद्देश्य पर विशेष जोर दिया गया है और साथ ही उन समुदायों के दैनिक जीवन की तकनीकों को भी दर्शाया गया है।

कोलंबिया की पुरातत्वीय धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए 1934 में बैंक ऑफ़ द रिपब्लिक (कोलंबिया) ने जो पहल की थी, उसने आज देश के सबसे दर्शनीय पर्यटक-स्थल का रूप ले लिया है। पिछले आठ दशकों में इस गोल्ड म्यूजियम ने कितने ही रूप बदले और आज इसमें अस्थायी प्रदर्शिनी कक्षों, ऑडिटोरियम, रेस्तरां, कैफ़े और एक सौवेनिर स्टोर समेत कितने ही विस्तार हो चुके हैं।

यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि म्यूजियो डेल ओरो में जो चमकता है वह सचमुच सोना ही होता है।

संदर्भ

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