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एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल गोल्ड माइनिंग का भविष्य

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 मंगल और बृहस्पति के बीच ढेरों क्षुद्रग्रहों में के बीच 16 साइके नामक एक क्षुद्रग्रह परिक्रमा कर रहा है। 16 साइके का व्यास लगभग 226 किमी है और, कई अन्य खोजे गए क्षुद्रग्रहों से इतर, चट्टानों और बर्फ के बजाय पूरी तरह से धातुओं से बना माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 16 साइके किसी प्रारंभिक ग्रह के मूल का हिस्सा है और लाखों वर्षों तक लोहा और निकेल जैसी धातुओं की हमारी माँग को पूरा कर सकता है। इसके बारे में अधिक रोमांचक यह है कि, ऐसा माना जाता है कि 16 साइके में कीमती धातुओं का प्रचुर भंडार है - इसके मौजूद सोने की अनुमानित कीमत $ 700 क्विंटीलयन डॉलर होने का अनुमान है। इसी धात्विक कोर में लोहा और निकेल के अलावा भारी मात्रा में सोना और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुएँ मौजूद हैं। नासा 2022 में 16 साइके क्षुद्रग्रह के लिए एक अंतरिक्ष यान भेजेगा, जो इसकी सतह की मैपिंग करने और इसके गुणों का अध्ययन करने के लिए लगभग 21 महीने वहाँ काम करेगा।

सोने सहित कई अन्य कीमती धातुएँ कई अन्य क्षुद्रग्रहों और जले हुए धूमकेतुओं में मौजूद हैं, जिसमें चंद्रमा का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है। क्षुद्रग्रह खनन सोने के खनन के भविष्य की दिशा में बड़ी छलांग साबित होगी; आइए देखें कि यह हमारे लिए क्या आवश्यक है:

क्षुद्रग्रह खनन उद्योग का आकार

2017 में, क्षुद्रग्रह खनन उद्योग का मूल्य $ 712 मिलियन था, लेकिन 2025 तक प्रति वर्ष सीएजीआर 24.4% की गति से बढ़ने का अनुमान है, जो इसे लगभग $ 3.9 बिलियन तक ले जाएगा। क्षुद्रग्रह खनन में ऐसे क्षुद्रग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों की पहचान करना शामिल है, जिनमें धातुओं और अन्य खनिजों की प्रचुर मात्रा है, उन पर खनन संबंधी बुनियादी ढांचे की स्थापना, उक्त धातुओं और खनिजों के लिए उनका खनन करना, और शायद उन्हें अनुसंधान या उपयोग के लिए पृथ्वी पर वापस भेजना शामिल है। सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्र अक्सर साझेदारी में क्षुद्रग्रह खनन में शामिल होते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसियां और निजी कंपनियाँ इस समय इसमें सबसे आगे हैं। NASA 2022 में साइके मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार है। यह एक मानव रहित मिशन है। साइके अंतरिक्ष यान में 16 साइके क्षुद्रग्रह की सतह और सामग्री का विश्लेषण करने और मानचित्रण करने के लिए सॉफिस्टिकेटेड उपकरण लगे होंगे। 

संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा सक्रिय भू-राजनीतिक देशों में लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका शामिल हैं। निजी क्षेत्र में, क्षुद्रग्रह खनन क्षेत्र की प्रमुख अंतरिक्ष कंपनियों में आईस्पेस, क्लोस स्पेस, एस्टरॉयड माइनिंग कंपनी, प्लैनेटरी रिसोर्सेज और वर्जिन गैलेक्टिक आते हैं।

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चंद्र खनन: सोने के लिए अगली दौड़?

क्षुद्रग्रह का खनन आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन इसमें कई तकनीकी चुनौतियाँ भी हैं। किसी के लिए भी, पृथ्वी के निकट के अधिकांश क्षुद्रग्रह अभी भी काफी दूर हैं और उन पर खनन संभव बनाने के लिए उन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा में लाना होगा, जो कोई आसान काम नहीं है। हालाँकि, चाँद पर खनन की संभावना ज्यादा है।

चंद्रमा में तीन ऐसे तत्व हैं जो इसे खनन के दृष्टिकोण से आकर्षक बनाते हैं: हीलियम -3, पानी और दुर्लभ धातुएँ।

हालाँकि, चंद्रमा पर (और विस्तारित करके क्षुद्रग्रहों पर) खनन में तकनीकी और लॉजिस्टिक संबंधी काफी बाधाएँ हैं। चंद्रमा पर खनन के लिए, मनुष्यों को उस पर काफी बुनियादी ढांचा स्थापित करना होगा, जिसमें सॉफिस्टिकेटेड 3D प्रिंटर, स्वायत्त खनिक रोबोट, प्रसंस्करण उपकरण और कुछ प्रकार के ल्यूनर बेस शामिल हैं, लेकिन ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। इन उपकरण को चांद पर भेजना भी उतना ही महँगा होगा; चँद्रमा लगभग 400,000 किलोमीटर दूर है, और वर्तमान में चंद्रमा की सतह पर 1 किलो सामग्री भेजने में अनुमानतः 15 हजार डॉलर  का खर्च आता है। हालाँकि, स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी कंपनियाँ पुन: उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट बनाने का प्रयास कर रही हैं जो इन लागतों को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, प्रसंस्करण के लिए चँद्रमा की असंसाधित मिट्टी और अयस्क को पृथ्वी पर भेजना संभव नहीं हो सकता है; इस तरह के प्रसंस्करण को चंद्रमा पर ही करना पड़ सकता है, साथ ही, अर्ध-संसाधित और/या संसाधित सामग्री या तो रॉकेट या किसी अन्य उद्देश्य से निर्मित वितरण प्रणाली द्वारा भेजी जा सकती है। इस तरह के जटिल ऑपरेशन को दूर से चलाने में अनेकों चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। और अंत में, इस तरह के एक ऑपरेशन में कानूनी और भू-राजनीतिक जटिलताएँ शामिल हैं- क्या चंद्रमा, साथ ही क्षुद्रग्रह जैसे अन्य अंतरिक्ष चट्टानों को "अंतरिक्ष जन" के रूप में वर्गीकृत किया जाता है? क्या दुनिया के सभी देशों को इसके संसाधनों पर समान अधिकार हैं?

हालाँकि, किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी या निजी अंतरिक्ष कंपनी ने अभी तक चंद्रमा पर खनन का प्रयास नहीं किया है, किंतु इसकी संभावना में रुचि बढ़ रही है। अप्रैल 2020 में, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कंपनियों को चंद्रमा और अंतरिक्ष के अन्य पिण्डों पर खनन के लिए प्रोत्साहित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यकारी आदेश वाणिज्यिक भागीदारों को अंतरिक्ष में संसाधनों को पुनर्प्राप्त करने और उपयोग करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करता है। हालाँकि, चंद्रमा पर खनन में अभी भी तकनीकी और लॉजिस्टिक संबंधी काफी बाधाएँ हैं। इसके लिए उपकरण और सामग्री को अंतरिक्ष में ले जाना, खनन और अयस्क का प्रसंस्करण लगभग स्वायत्त रोबोट और मशीनों द्वारा किया जाना, और संसाधित या अर्ध-संसाधित धातु और गैस को पृथ्वी पर ले जाना होगा।

सोने के लिए क्षुद्रग्रह खनन का वैश्विक स्वर्ण व्यवस्था पर प्रभाव

16 साइके जैसे क्षुद्रग्रहों में सोना विशाल मात्रा में उपलब्ध है, जिसका अगर खनन किया गया, तो सोने की वैश्विक व्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। अगर क्षुद्रग्रहों से बड़ी मात्रा में सोने का सफलतापूर्वक खनन किया गया, तो इसके परिणामतः बाजार में सोने की भरमार इसकी कीमतों को कम कर सकती है, शायद उन्हें एकदम नीचे भी ला सकती है। यह संभावना नहीं है कि सोने की मौजूदा कीमतों को बनाए रखने के लिए आपूर्ति में अत्यधिक तेजी आने पर समान रूप से माँग को भी बढ़ाया जा सके। हालाँकि, एक संसाधन के रूप में सोने के एप्लिकेशन में विस्तार किया जाना, आपूर्ति में मामूली वृद्धि होने पर सोने की कीमत को स्थिर रखने या बढ़ाने की क्षमता रखती है। 
 
किसी भी स्थिति में, सोने के लिए क्षुद्रग्रहों के सफल खनन से वैश्विक स्वर्ण व्यवस्था को झटका लगने की संभावना है। जो कंपनियाँ या सरकारें सफलतापूर्वक क्षुद्रग्रहों से सोने का खनन करेंगी, वे सोने के आपूर्ति पक्ष पर हावी होंगी और परिणामतः इसके मूल्य निर्धारण पर हावी रहेंगी।

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