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सोने का बीमा से निवेश का रूप

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निवेश
22 Apr 2019

खुदरे निवेशक सोने को किस रूप में देखें?

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Gold investment portfolio

भारतीय लोगों के दिलों और घरों में सोने की जगह दूसरा कुछ नहीं ले सकता। हालाँकि आपको यदि शंका है कि आपके निवेश पोर्टफोलियो में सोना कैसी भूमिका निभा सकता है, तो आगे पढ़िए और जानिए कि क्यों निवेश गुरु हंसी मेहरोत्रा का मानना है कि सोना एक आधुनिक खुदरे निवेशक के पोर्टफोलियो के लिए आदर्श है:

विविधीकरण – यदि आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधीकरण (डायवर्सिफिकेशन) लाना चाहते हैं, तो सोना एक सरल विकल्प है। इक्विटी और बॉन्ड जैसी कई वित्तीय परिसम्पत्तियों के साथ सोने का बहुत निम्न सहसम्बंध है। इस कारण, यह एक बेहतरीन डायवर्सिफायर का काम करता है और सुनिश्चित करता है कि गिरते स्टॉक मार्केट में भी आपके निवेश की लाभप्रदता बनी रहे। यदि आप अपने पोर्टफोलियो को विविधीकृत करना चाहते हैं, तो आप सोने के अलग-अलग रूपों में निवेश कर सकते हैं, जैसे एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), गोल्ड फंड, या भौतिक सोना।

पोर्टफोलियो बीमा – जैसे आप अपने जीवन, स्वास्थ्य या कार को किसी अप्रत्याशित संकट से बचाने के लिए बीमा खरीदते हैं, तो आपको अपने पोर्टफोलियो का भी बीमा कराना चाहिए। सोना आपके निवेश के लिए बीमे का काम कर सकता है। परम्परागत तौर पर देखें तो सोने का ज़्यादातर मार्केट-आधारित निवेश विकल्पों के साथ उल्टा सम्बंध रहा है। इसलिए, जब आपके अधिकतर वित्तीय परिसम्पत्तियों का मूल्य घटता है, तो सोने का मूल्य बढ़ने की सम्भावना रहती है।

तो यदि आपने मंदी से पहले के दौर में शेयर और सोना दोनों में निवेश किया होगा, तो सम्भावनाएँ हैं कि मंदी के कारण आपके इक्विटी पोर्टफोलियो में जो नुकसान हुए हों, आपके सोने के स्टॉक ने उसकी पूर्ति कर दी हो।

सम्बंधित लेख: स्टॉक मार्केट की गिरावट का सोने पर प्रभाव

तरलता – एक निवेश परिसम्पत्ति के रूप में, सोना सहजता से उपलब्ध होता है, तरल होता है, सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होता है और पारदर्शी होता है। ये सभी विशेषताएँ मिलकर सोने को धन प्रतिधारण के लिए एक भरोसेमंद वस्तु बनाती हैं। दीर्घ-काल में सोने का अंतर्निहित मूल्य भी रह जाता है, और ये किसी ब्लू-चिप कम्पनी के शेयर की तरह भी नहीं होतीं, जो अर्थ-व्यवस्था पर या कम्पनी के प्रदर्शन पर निर्भर हो। सोने में भौतिक टिकाऊपन होता है और यह दीर्घ-कालीन निवेश नीति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। इस विशेषता के बावजूद, सोना बेहद तरल होता है – उसे गिरवी भी रखा जा सकता है या उसके बदले आसानी से एक बंधक ऋण यानि मॉर्ट्गेज लोन भी लिया जा सकता है।

वास्तविकता – सोना निवेश के लिए एक पसंदीदा प्रारूप है क्योंकि यह एक वास्तविक परिसम्पत्ति भी है। यह माना गया है कि भौतिक सोना लोगों में सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी का भाव लाता है। और ज़मीन या घर जैसे दूसरे मूर्त या वास्तविक परिसम्पत्तियों के मुक़ाबले, सोना खरीदना बहुत ही सरल और सुविधाजनक होता है।

यहीं पर सोने की धन प्रतिधारण की विशेषता काम आती है। जैसे-जैसे स्थानीय मुद्रा की क्रय क्षमता होती जाती है, आम तौर पर सोने की कीमत में उछाल आ जाता है। इसके परिणामस्वरूप, लोग अपनी सम्पत्ति सोने के रूप में रखना चाहते हैं। जब मुद्रास्फीति में तेज़ी आती है, ख़ासतौर पर दो अंकों तक पहुँच जाने पर, सोना दीर्घ-कालिक सम्बल के रूप में काम करता है।

सम्बंधित लेख: सोने को मुद्रास्फीति में रक्षक क्यों माना जाता है?

भूराजनैतिक कारक – वैश्विक भूराजनैतिक उथल-पुथल के दौरान सोने पर सकारात्मक प्रभाव होना माना गया है। हाल ही में, कोरिया के परमाणु शस्त्रों पर राजनैतिक तनाव के कारण इक्विटी मार्केट में काफी आघात पहुँचा लेकिन वास्तव में सोने की कीमत में सुधार आया। इसका कारण यह है कि ऐसी अनिश्चित परिस्थितियों में, लोगों को वित्तीय संकट लौटने का और सम्पत्ति घटने का भय होता है। तो वे सोने में भारी निवेश करना शुरु कर देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यह एक प्रभावशाली धन प्रतिधारण साधन है।

परम्परागत तौर पर, भारत में सोना खरीदना हमारी संस्कृति और परम्परा का हिस्सा था, लेकिन इसकी खरीद के पीछे कई उक्त वैध कारण भी बताये गये हैं, जिनसे शैक्षणिक बोध भी होता है। तो, अभी तक यदि आपने सोने में निवेश नहीं किया है, तो देर मत कीजिए – यही सही समय है!

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