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स्वर्ण – देवताओं का धातु

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स्वर्ण बाज़ार का उदारीकरण : 1990-2000

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भारत और इसका असाधारण स्वर्णिम गौरव

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मनुष्य ने किसी समय धातु का कुशल प्रयोग सीखना आरम्भ किया था, जिसे धातुकर्म के नाम से जाना जाता है. जल्द ही हम सबसे पहले सिक्को के रूप में मुद्रा के लिए इसका प्रयोग करने लगे और तत्पश्चात धन का प्रदर्शन और सुन्दरता में वृद्धि के लिए आभूषण के रूप में इसका प्रयोग करने लगे. इस प्रक्रिया में काफी तेजी से स्वर्ण की हैसियत सबसे मूल्यवान और वांछितवंचित धातुओं में से एक की हो गयी.

लगभग 7,000 वर्ष पहले से यूरोपीय सभ्यता में आभूषण निर्माण की परम्परा की जडें मजबूत थीं. किन्तु भारत ने किसी प्रकार से आभूषण के प्रति इतना मजबूत लगाव कर लिया कि यह हमारे दैनिक जीवन और धर्म का अभिन्न हिस्सा बन गया.

भारत में आभूषण उद्योग काफी बड़ा है जिसमे लगातार नये-नये और अलग-अलग तरह के अलंकार बनते रहते हैं. किन्तु स्वर्ण आभूषण के कुछ कलात्मक रूप हैं जो अब विभिन्न कारणों से दुर्लभ हो गए हैं. इस आलेख में हम इन विलुप्त स्वर्ण आभूषणों के कुछ सुन्दर प्रकारों की जानकारी दे रहे हैं.

पाम्बदम

आभूषण के दुर्लभ या विलुप्त रूपों में से एक है पाम्बदम. दक्षिण भारत के राज्यों में कभी-कभार दिखाई देने वाला यह आभूषण एक कुंडल (कान की बाली) है जिसे साँप के फण के आकार में बनाया जाता है. इसमें दो गोला और दो गाँठों को मिलाकर आभूषण का रूप दिया जाता है. पाम्बदम तमिल भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘सांप का फण’. इसकी बनावट में हमेशा सांप का फण दर्शाया जाता है. यह कुंडल इतना भारी होता है कि कान की लोलकी (ईअरलोब) फ़ैल जाती है जिसे कुंडल पहनने के लिए विशेष छूरी से छेदा जाता है.

पच्चीकम

यह गुजरात के कच्छ इलाके का एक खूबसूरत आभूषण है. इसका नाम गुजराती शब्द ‘पच्चीगर’ से लिया गया है जिसका अर्थ ‘सुनार’ होता है. यह आभूषण कलाकृति में अलग-अलग रंग भरने के लिए विशेष रूप से अर्द्ध-कीमती और स्वर्ण का प्रयोग करके तैयार किया जाता है.

स्वामी आभूषण

आभूषण के इस रूप की उत्पत्ति लगभग 5000 वर्ष पहले दक्षिण के तमिलनाडु राज्य में हुयी थी. इस आभूषण का आधुनिक रूप आजकल चांदी या टेराकोटा से बनाया जाता है, तथापि हमारे पूर्वजों द्वारा स्वर्ण से बने इस आभूषण की मौलिक सुन्दरता कुछ अलग ही थी.

कुल मिलाकर, भारत का इतिहास शानदार और सुन्दर रहा है. हम अक्सर देखते हैं कि भारत में डिज़ाइनर द्वारा पुराणी विरासत में रूचि के कारण आभूषणों की पुराणी शैली आधुनिक रूप लेकर प्रचलन में लौट आती है. हो सकता है कि इनमे से किसी पर किसी नए डिज़ाइनर या सेलेब्रिटी की नजर पड़ जाए और यह पुनः प्रचलन में आ जाए.

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